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मेरे होठों को नही पता मेरे दिल का हाल

मेरे होठों को नही पता मेरे दिल का हाल
क्योंकि उनपे मुस्कान आ जाती है हर बार
वो तेरी बातों पे जो आया करता था गुस्सा
अब तेरे हर हर्फ़ सुनने के लिए मैं रहता हूँ बेक़रार

आदत है तेरे चेहरे को हर रोज देखने की
पर अब बस तस्वीरों को देख के करता हूँ ऐतबार
वो तेरे  शैतानियों पे जो रूठा करता था मैं
अब बस उन हरकतों को याद कर हंस लेता हूँ बार-बार

ऐसा नहीं के भूल गया तुझे मैं
बस मिलने से कतराता हूँ अब मैं यार
सोच लेना जो सही लगे तुम्हे
अब नज़रो के सामने भी अंजान बन के रहूँगा हर बार

---सूरज पांडेय

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