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Chain Ki Chaadar

लाख कोशिशें कर लीं मगर,
ये दिल जगाए नहीं जगता है।
सदियों से सोया है जिस बिस्तर पर,
उससे कतई छोड़ते नहीं बनता है।

सुंदर सपना देख रहा है कोई,
चेहरे पर मुस्कान गज़ब की आयी है।
बंद आंखों से मानो बोल रहा हो,
"यादों की इस चादर में, ऐ मालिक,
नींद बड़ी सुहानी आयी है।"

कुछ चुटकुले हैं, जिन पर वो हँसना चाहता है।
कुछ आँसू रह गए, जिनहें वो पोछना चाहता है।
और आज जब आखिरकार चला हूँ इसको जगाने,
तो कुछ पल हैं जिनको दिल वापिस जीना चाहता है।

खैर, अब उन कहानियों से भारी शामें ढल चूकीं,
नई सुबह के सूरज में उठ खड़े हो जाना पड़ेगा।
बिस्तर छोड़ वक़्त की गाड़ी पकड़ने,
क्योंकि यादों का क्या है?
आज नहीं तो कल एक नई चादर को खुद ही बुन जाना पड़ेगा।

    --- HARSHIT MEHROTRA

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এই শহর, আমার শহর, ভালোবাসার শহর, ঐতিহ্যের শহর, মিষ্টির শহর আর আরো অনেক কিছু ভালোলাগার মতো শহর, এরই নাম কলকাতা । যেখানে মানুষের দিন চালু হয় ল্যাদ দিয়ে আর শেষ হয় রাজ্যের ভিত্তিহীন কথাবার্তা দিয়ে , তবুও  এই  আমার শহর ভালোবাসার শহর । হাওড়া স্টেশন থেকে ভিড় নেমে এসে পড়ে হাওড়া ব্রিজে আর তারপর আসে এই শহরে , তারপর সে কতোই না রাগ কতোই না বিদ্বেষ কতোই না প্রেম আর শেষে কিছু সব ভুলে গিয়ে ভালোবেসে বাড়ি ফেরা , তাই এই শহর ভালোবাসার শহর । এই শহর কবিগুরুর , এই শহর নেতাজির , এই শহরের বাতাশে আছে সাহিত্য আছে স্বাধীনতার ভাবনা , আছে কবিগুরুর কাজ, আছে নেতাজির ফিরে আসার কামনা, তাই এই শহর আশার শহর। RAY থেকে ঘোষ , অপু থেকে শঙ্কর সব আছে এই শহরে , চলচ্চিত্র নিয়ে ভাবি আগে আমরা তারপর ভাবে পুরো দুনিয়া, তাই এই শহর চলচিত্রের শহর। বন্ধুত্বের মধ্যে আসে কিছু ভাবনা , আর তার থেকেই বেরোয় "এই বোকাচোদা", শুনতে খারাপ লাগলেও, মনে লাগেনা , তাই এই শহর একটু অন্য রকম ভাবে বন্ধুত্ব মানানোর শহর । ফেলুদা থেকে ব্যোমকেশ , কিরীটি থেকে শবর সব আছে এই শহরে , রহস্যের এই শ...