Skip to main content

Lucky Customer can win Apple 6s....

क्यों ?

हम क्यों अपना कल बदलना चाहते हैं ?
क्यों अपने आने वाले कल से घबराते हैं ?
क्यों अपने सवालों के जवाब दूसरो से सुनना चाहते हैं ?
क्यों खुद से छुप कर लोगो की तलाश में निकल जाते हैं ?

इस 'क्यों' को कब तक साथ लेकर चलेंगे ?
अब कुछ ही वर्ष बचे हैं
कब तक उसी अंधकार में रहेंगे हम ?

हमें छोड़ कर जाना फैसला था उनका ,
क्यों उनके यादों में जीना बन गई हमारी मज़बूरी ?
सब कुछ ठीक सा था ,
फिर क्यों बना ली हमने सबसे दूरी ? 

दूसरो के सपने पूरे करते करते खुद की नींद कुचल दी हमने ।
महान बनने की चाहत में खुद से नफ़रत कर ली हमने ।
क्यों किसी से मिलते ही उनसे अलग होने का सोचते है हम ?
क्यों खुद को खत्म होते देख दूसरो को जोड़ते है हम ?

कब तक इस 'क्यों' के बीच छुपे रहेंगे ?
अब कुछ ही वर्ष बचे हैं
कब तक आंखें बन्द रखेंगे हम ?

खुद को धोखे में रख उसका विश्वास जीत लिया हमने ।
उसके खुशी के व्यापार में अपना जीवन बेच दिया हमने ।
बदले में तो कुछ उम्मीद थी नहीं ,
फिर क्यों उसके इंतज़ार में परछाइयों से दोस्ती कर ली हमने ?

कब तक इस 'क्यों' का जवाब ढूंढेगे ?
अब कुछ ही वर्ष बचे हैं 
कब तक ऐसे जीयेंगे हम ?

           
                                    - स्वाति सिंह


Comments

Followers

Popular posts from this blog

প্রেম মানে কি ? আসলে কি ?

প্রেম   মানে   কি  ?   আসলে   কি  ?   প্রেম   মানে   কি  ?   প্রেম   মানে   ভালোবাসা ,    প্রেম   মানে   ভালোলাগা ,   কাউকে   প্রথমবার   দেখে ,  তাকে   প্রত্যেক   তা   মুহূর্ত   দেখার   ইচ্ছে   হওয়া ,   একেই   বলে   প্রেম ।   তার   নাম   না   জেনেও ,   তার   ব্যাপারে   কিছু   না   জেনেও ,   তার   জন্য   সব   কিছু   করতে   পাড়ার   অনুভূতি   হওয়া ,   একেই   বলে   প্রেম ।   তাকে   প্রথম   বার   ভিড়   বাসে   দেখে ,   শুধু   তাকেই   দেখতে   থাকা ,   একেই   মনে   হয়   বলে   প্রেম ।   একই   জায়গায়   কাজ   করা ,   কোনো   সময়   দেখা   হলে   মুচকি   হাসা...

আমার শহর কলকাতা

এই শহর, আমার শহর, ভালোবাসার শহর, ঐতিহ্যের শহর, মিষ্টির শহর আর আরো অনেক কিছু ভালোলাগার মতো শহর, এরই নাম কলকাতা । যেখানে মানুষের দিন চালু হয় ল্যাদ দিয়ে আর শেষ হয় রাজ্যের ভিত্তিহীন কথাবার্তা দিয়ে , তবুও  এই  আমার শহর ভালোবাসার শহর । হাওড়া স্টেশন থেকে ভিড় নেমে এসে পড়ে হাওড়া ব্রিজে আর তারপর আসে এই শহরে , তারপর সে কতোই না রাগ কতোই না বিদ্বেষ কতোই না প্রেম আর শেষে কিছু সব ভুলে গিয়ে ভালোবেসে বাড়ি ফেরা , তাই এই শহর ভালোবাসার শহর । এই শহর কবিগুরুর , এই শহর নেতাজির , এই শহরের বাতাশে আছে সাহিত্য আছে স্বাধীনতার ভাবনা , আছে কবিগুরুর কাজ, আছে নেতাজির ফিরে আসার কামনা, তাই এই শহর আশার শহর। RAY থেকে ঘোষ , অপু থেকে শঙ্কর সব আছে এই শহরে , চলচ্চিত্র নিয়ে ভাবি আগে আমরা তারপর ভাবে পুরো দুনিয়া, তাই এই শহর চলচিত্রের শহর। বন্ধুত্বের মধ্যে আসে কিছু ভাবনা , আর তার থেকেই বেরোয় "এই বোকাচোদা", শুনতে খারাপ লাগলেও, মনে লাগেনা , তাই এই শহর একটু অন্য রকম ভাবে বন্ধুত্ব মানানোর শহর । ফেলুদা থেকে ব্যোমকেশ , কিরীটি থেকে শবর সব আছে এই শহরে , রহস্যের এই শ...

साधारण हूँ मैं

हां इस दुनिया मे बहुतो के लिए उद्धरण हूँ मैं अनोखे सोच को पीछे करने का कारण हूँ मैं   तिरस्कार अब क्यों करती है दुनिया मेरी क्या गलती मेरी सिर्फ इतनी सी है के साधारण हूँ मैं सच को झूठ मे बदलता हूँ मैं हर बार अपनी चीज़ों को खोने से डरता हूँ मैं घनिष्ट बहारो मे खोया हुआ एक तिनका हूँ मैं हां ये सच है के साधारण हूँ मैं वो चाँद को पाने की ख्वाहिश करता हूँ मैं पर मेहनत करने से डरता हूँ मैं जीत की ख़ुशी से ज्यादा हार से बचने का प्रयास करता हूँ मैं हां ये सच है के साधारण हूँ मैं सपनो से ज्यादा रिश्तों को अहमियत देता हूँ मैं बिगड़ते हालात मे सबसे पहले अपनी फिक्र करता हूँ मैं देख ख़ुशी किसी और की उन लोगो से जलता हूँ मैं हां ये सच है के साधारण हूँ मैं इस दुनिया मे बहुतो के लिए उद्धरण हूँ मैं अनोखे सोच को पीछे करने का कारण हूँ मैं तिरस्कार अब क्यों करती है दुनिया मेरी क्या खुद के वजह से बना साधारण हूँ मैं --- sur@j p@ndey